राजवाड़ा शहर से बनेरी गाँव को जोड़ने वाली एक लंबी सुनसान सड़क थी — मीलस्टोन रोड। दिन में उस सड़क पर ट्रक, बसें और बाइकें दौड़ती थीं, लेकिन रात होते ही वह सड़क जैसे मर जाती थी।
न कोई गाड़ी, न कोई इंसान… और अगर कोई दिखता भी, तो वह इंसान नहीं होता।
लोग कहते थे,
“उस रोड पर एक भूतनी दिखती है।”
ज़्यादातर लोग इसे अफ़वाह मानते थे, लेकिन टैक्सी ड्राइवरों और ट्रक वालों के बीच इस भूतनी की कहानी बहुत मशहूर थी।
पहली झलक
अमन एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था। एक रात उसे ज़रूरी काम से पास के शहर जाना पड़ा। उसकी बाइक खराब थी, इसलिए उसने कार निकाली। समय हो चुका था रात के 11:45।
जैसे ही वह मीलस्टोन रोड पर पहुँचा, चारों तरफ़ अजीब सन्नाटा था। मोबाइल नेटवर्क गायब, स्ट्रीटलाइट्स आधी बंद।
तभी उसने आगे सड़क पर कुछ देखा।
एक औरत…
सफ़ेद कपड़ों में…
लंबे खुले बाल…
और नंगे पाँव सड़क के बीच खड़ी।
अमन ने ब्रेक लगा दिए।
“इतनी रात को कौन खड़ा रहता है?” उसने सोचा।
मदद या मुसीबत?
वह औरत धीरे-धीरे कार के पास आई। उसकी चाल सामान्य नहीं थी — जैसे ज़मीन पर चल ही नहीं रही हो।
उसने काँच पर हल्के से दस्तक दी।
टिक… टिक…
“भैया… मुझे छोड़ दो… बहुत दूर जाना है…”
आवाज़ में अजीब सी गहराई थी। अमन का दिल तेज़ धड़कने लगा। उसे याद आया कि लोगों ने इसी तरह शुरू होने वाली भूतनी की कहानी सुनाई थी।
फिर भी इंसानियत जीत गई।
उसने गेट खोल दिया।
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कार के अंदर का सन्नाटा
औरत चुपचाप पीछे बैठ गई। कार स्टार्ट होते ही रेडियो अपने आप चालू हो गया।
रेडियो पर एक पुरानी खबर चल रही थी—
“आज से ठीक 15 साल पहले, इसी मीलस्टोन रोड पर एक युवती की सड़क हादसे में मौत…”
अमन ने तुरंत रेडियो बंद कर दिया।
पीछे बैठी औरत ने धीमी आवाज़ में पूछा,
“डर गए?”
अमन ने जवाब नहीं दिया।
सच्चाई का खुलासा
कुछ किलोमीटर आगे बढ़ने के बाद अमन ने अचानक महसूस किया —
रियर व्यू मिरर में पीछे कोई नहीं था।
उसकी रगों में ठंड दौड़ गई।
“आप… आप कहाँ हैं?” उसने काँपती आवाज़ में पूछा।
तभी उसके कान के पास एक फुसफुसाहट आई—
“यहीं हूँ…”
कार के सारे शीशे अचानक धुंध से भर गए। तापमान एकदम गिर गया।
और फिर वह दिखाई दी —
अब सामने वाली सीट पर।
उसका चेहरा जला हुआ था, आँखों से खून बह रहा था।
“मैं उसी रोड पर मरी थी,” वह बोली,
“और अब हर रात किसी न किसी के साथ सफ़र करती हूँ।”
भूतनी का नियम
अमन रोने लगा।
“मैंने आपका क्या बिगाड़ा है?”
भूतनी की आवाज़ अब शांत थी।
“मैं सबको नहीं मारती,” उसने कहा,
“जो रुकता है, वही बचता है। जो भागता है… वही मरता है।”
उसने बताया कि हादसे वाली रात कोई भी उसकी मदद के लिए नहीं रुका था। वह घंटों सड़क पर तड़पती रही।
“अब मैं सड़क पर दिखती हूँ,” उसने कहा,
“ताकि लोग रुकना सीखें।”
सुबह का सच
अगली सुबह अमन की कार सड़क किनारे खड़ी मिली। अमन बेहोश था, लेकिन ज़िंदा।
उसके बाद से अमन ने नौकरी छोड़ दी और फिर उस रोड पर कभी सफर नहीं किया।
और आज भी, जो लोग उस सड़क पर रात में सफ़ेद कपड़ों वाली औरत को देखते हैं,
वे या तो रुकते हैं…
या फिर कभी वापस नहीं आते।
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