राहुल एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाला होनहार छात्र था। उसने अपने शहर से दूर, एक नामी कॉलेज में एडमिशन लिया था। पढ़ाई के साथ-साथ उसे एक अच्छी नौकरी का सपना भी था। कॉलेज शुरू होने से पहले ही वह नए शहर पहुँच गया ताकि समय रहते रहने की जगह मिल सके।
कॉलेज के पास रहना उसके लिए ज़रूरी था, क्योंकि रोज़ाना आने-जाने में समय और पैसे दोनों बचते। इसी वजह से वह कॉलेज के आस-पास ही किराए का कमरा ढूँढने लगा। लेकिन परेशानी ये थी कि उस इलाके के ज़्यादातर कमरे उसके बजट से काफी बाहर थे।
दो दिन तक भटकने के बाद, एक पुरानी-सी लेकिन बड़ी इमारत पर उसकी नज़र पड़ी। बाहर “किराए पर कमरा उपलब्ध है” का बोर्ड लगा था। उसने अंदर जाकर पूछताछ की। मकान मालिक ने उसे बताया कि तीसरी मंज़िल पर एक कमरा खाली है और उसका किराया सुनकर राहुल के चेहरे पर मुस्कान आ गई। किराया इतना कम था कि उसे यकीन ही नहीं हुआ।
जब वह इमारत के अंदर गया तो देखा कि पहली और दूसरी मंज़िल पर कई लोग रहते थे। लेकिन तीसरी मंज़िल सुनसान थी। कुल पाँच कमरे थे, और सबके दरवाजे पर मोटे ताले लगे हुए थे।
नीचे रहने वाले कुछ किराएदारों ने जब सुना कि राहुल तीसरी मंज़िल पर कमरा लेने जा रहा है, तो उन्होंने उसे मना किया।
“भाई, ऊपर मत जाना,” एक बुज़ुर्ग किराएदार ने कहा।
“क्यों?” राहुल ने हैरानी से पूछा।
“वो मंज़िल ठीक नहीं है… haunted है।”
किराएदारों ने बताया कि तीसरी मंज़िल पर एक भूतनी का वास है, जो वहीं तक सीमित है। कई लोगों ने अजीब घटनाएँ देखी हैं, इसलिए कोई वहाँ नहीं रहता।
राहुल पढ़ा-लिखा लड़का था। उसे ये सब बातें बेकार और मनगढ़ंत लगीं। सस्ते किराए के लालच में उसने ज़्यादा कुछ सोचे बिना कमरा ले लिया और उसी दिन अपना सामान शिफ्ट कर लिया।
दिन में सब कुछ बिल्कुल सामान्य लगा। कमरा छोटा था, लेकिन साफ़-सुथरा। खिड़की से कॉलेज भी दिखाई देता था।
लेकिन रात होते ही माहौल बदलने लगा।
करीब 11 बजे राहुल अपने बिस्तर पर बैठकर मोबाइल चला रहा था। अचानक—
ठक… ठक… ठक…
दरवाज़े पर खटखटाहट हुई।
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राहुल उठा और दरवाज़ा खोला। बाहर कोई नहीं था। पूरी तीसरी मंज़िल पर सन्नाटा पसरा हुआ था। चारों बंद कमरों के ताले ऐसे लग रहे थे जैसे वर्षों से किसी ने उन्हें छुआ भी न हो।
उसने दरवाज़ा बंद किया ही था कि फिर—
ठक… ठक…
इस बार खटखटाहट और तेज़ थी।
राहुल ने झट से दरवाज़ा खोला, लेकिन फिर वही—कोई नहीं। अब उसे अजीब लगने लगा। उसने पूरे फ्लोर पर जाकर देखा, लेकिन कोई मौजूद नहीं था। नीचे दूसरी मंज़िल से लोगों की बातें और हँसी की आवाज़ें आ रही थीं, मगर तीसरी मंज़िल कब्रिस्तान जैसी खामोश थी।
डर धीरे-धीरे उसके दिल में उतरने लगा।
वह वापस कमरे में आया, दरवाज़ा बंद कर लॉक किया और भगवान का नाम लेने लगा। घबराहट में उसने हनुमान चालीसा पढ़नी शुरू कर दी। कुछ देर बाद थकान के कारण उसकी आँख लग गई।
कुछ देर बाद
छन… छन…
एक अजीब-सी आवाज़ से उसकी नींद खुल गई।
ये आवाज़ किसी लड़की की पायल की थी।
राहुल का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। आवाज़ कमरे के बाहर बरामदे से आ रही थी। डरते-डरते उसने दरवाज़ा खोला।
थोड़ी दूरी पर, बरामदे में एक औरत खड़ी थी।
सफेद साड़ी…
लंबे काले खुले बाल…
पीठ उसकी तरफ…
पायल की छन-छन उसी के पैरों से आ रही थी।
वह औरत धीरे-धीरे चलने लगी और अचानक बरामदे की दीवार पर चढ़ गई। अगले ही पल उसने नीचे छलांग लगा दी।
राहुल चीखते-चीखते दीवार की तरफ भागा और नीचे झाँका।
नीचे सड़क खाली थी।
कोई लाश नहीं…
कोई औरत नहीं…
अचानक उसकी गर्दन पर ठंडी हवा चली। उसका पूरा शरीर सिहर गया।
उसने पीछे मुड़कर देखा—
वही औरत अब उसके कमरे के अंदर खड़ी थी।
उसकी आँखें काली थीं…
चेहरे पर अजीब-सी मुस्कान…
राहुल की हिम्मत जवाब दे गई। वह वहीं से दौड़ता हुआ नीचे दूसरी मंज़िल पर भागा और दरवाज़े पीटने लगा।
एक किराएदार ने दरवाज़ा खोला। राहुल रोते हुए सारी बात बता दी। कुछ ही देर में सारे किराएदार इकट्ठा हो गए।
“हमने पहले ही मना किया था,” एक आदमी बोला।
“वो मंज़िल haunted है।”
सबने उसे वहीं रात बिताने को कहा। किसी तरह उसने डर के साए में रात काटी।
सुबह होते ही वह अपने कमरे में गया, मकान मालिक से बात की और बिना एक पल रुके कमरा खाली कर दिया। अपना सारा सामान उठाकर वह किसी दूसरी जगह शिफ्ट हो गया।
कुछ दिनों बाद कॉलेज में दोस्तों के साथ बैठकर उसने ये पूरी घटना सुनाई।
तभी एक दोस्त ने गंभीर आवाज़ में कहा,
“तुम जानते हो वो लड़की कौन थी?”
राहुल ने नहीं में सिर हिलाया।
“कई साल पहले, उसी तीसरी मंज़िल पर एक लड़की ने आत्महत्या कर ली थी। प्यार में धोखा मिलने के बाद। तब से उसकी आत्मा वहीं भटकती है। मकान मालिक को सब पता है… लेकिन वो नए किराएदारों को सच नहीं बताता।”
राहुल के रोंगटे खड़े हो गए।
आज भी उस इमारत की तीसरी मंज़िल पर कोई नहीं रहता…
और रात के सन्नाटे में वहाँ से आज भी पायल की छन-छन सुनाई देती है…
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