बहुत समय पहले की बात है। भारत के एक सुंदर-से गाँव का नाम था सुखपुर। गाँव हरा-भरा था, चारों ओर खेत, पेड़-पौधे और एक छोटा-सा तालाब था। गाँव के लोग मेहनती, सच्चे और धार्मिक थे। हर सुबह मंदिर की घंटियाँ बजतीं और शाम को आरती होती।
लेकिन इसी गाँव में चार बच्चे रहते थे, जिनके नाम थे — राजू, गोलू, चिंटू और पिंटू। ये चारों बहुत ही शरारती थे। पढ़ाई में मन नहीं लगता था और दिनभर गाँव में उधम मचाते रहते थे।
वे कभी किसी की सब्ज़ी चुरा लेते, कभी कुएँ में पत्थर फेंक देते, तो कभी बूढ़ों का मज़ाक उड़ाते। बच्चों की शरारतों से पूरा गाँव परेशान हो चुका था। गाँव के बुज़ुर्ग उन्हें समझाते, माता-पिता डाँटते, लेकिन उन पर किसी बात का कोई असर नहीं होता।
गाँव के लोग आपस में कहते,
“ये बच्चे अगर ऐसे ही रहे, तो बड़े होकर और भी गलत रास्ते पर चले जाएँगे।”
गाँव के बीचों-बीच एक पुराना भगवान गणेश का मंदिर था। लोग मानते थे कि गणेश जी वहाँ साक्षात विराजमान हैं और सच्चे मन से प्रार्थना करने पर अवश्य सुनते हैं।
एक दिन गाँव के मुखिया ने मंदिर में सबको इकट्ठा किया और कहा,
“हमें भगवान गणेश से प्रार्थना करनी चाहिए कि वे इन बच्चों को सही राह दिखाएँ।”
सभी गाँव वालों ने मिलकर गणेश जी की पूजा की और बच्चों के सुधार की प्रार्थना की।
गणेश जी का आगमन
उसी रात चारों बच्चे हमेशा की तरह शरारत करने निकले। इस बार उन्होंने सोचा कि मंदिर के पीछे लगे आम के पेड़ से आम चुराएँगे। जैसे ही वे मंदिर के पास पहुँचे, अचानक ज़ोर की हवा चली, आसमान में बादल गरजने लगे और मंदिर से तेज़ रोशनी निकलने लगी।
चारों बच्चे डर गए।
अचानक मंदिर के द्वार खुले और सामने भगवान गणेश प्रकट हुए।
चारों बच्चे डर के मारे काँपने लगे और ज़मीन पर गिर पड़े।
भगवान गणेश ने मधुर स्वर में कहा,
“डरो मत बच्चों। मैं तुम्हें दंड देने नहीं, समझाने आया हूँ।”
राजू काँपते हुए बोला,
“महाराज, हमसे गलती हो गई। हमें माफ कर दीजिए।”
गणेश जी मुस्कुराए और बोले,
“माफी तभी मिलती है जब गलती समझकर सुधारा जाए।”
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सीख की शुरुआत
गणेश जी ने बच्चों को पास बिठाया और बोले,
“क्या तुम्हें पता है कि तुम्हारी शरारतों से गाँव वालों को कितना दुख होता है?”
गोलू ने सिर झुकाकर कहा,
“हमें लगा बस मज़ाक कर रहे हैं।”
गणेश जी बोले,
“मज़ाक और तकलीफ़ में फर्क होता है। जब किसी को दुख पहुँचे, तो वह मज़ाक नहीं कहलाता।”
फिर गणेश जी ने उन्हें एक-एक करके उनकी शरारतों के परिणाम दिखाए।
उन्होंने दिव्य शक्ति से ऐसा दृश्य बनाया जिसमें:
एक बूढ़ा आदमी कुएँ में गिरते-गिरते बचा
एक किसान की सब्ज़ी खराब हो गई
एक बच्चा डर के मारे रो पड़ा
यह सब देखकर चारों बच्चों की आँखों से आँसू बहने लगे।
चिंटू बोला,
“हमें नहीं पता था कि हमारी वजह से इतना नुकसान हो रहा है।”
अच्छे कर्मों की सीख
भगवान गणेश ने कहा,
“बच्चों, जीवन में दो रास्ते होते हैं — एक बुरा और एक अच्छा। बुरा रास्ता आसान लगता है, लेकिन अंत में दुख देता है। अच्छा रास्ता कठिन होता है, पर सुख और सम्मान देता है।”
उन्होंने आगे कहा,
“अगर तुम सच में माफी चाहते हो, तो अच्छे काम करके दिखाओ।”
पिंटू ने पूछा,
“हम क्या करें महाराज?”
गणेश जी बोले,
“गाँव की सेवा करो। बड़ों का सम्मान करो। पढ़ाई में मन लगाओ और किसी को दुख मत पहुँचाओ।”
यह कहकर गणेश जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया और बोले,
“अगर तुमने दिल से प्रयास किया, तो मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा।”
इतना कहकर भगवान गणेश अंतर्ध्यान हो गए।
बदलाव की शुरुआत
अगली सुबह गाँव वालों ने एक अजीब बदलाव देखा। वही चार शरारती बच्चे अब अलग दिखाई दे रहे थे।
राजू मंदिर की सफ़ाई कर रहा था
गोलू बुज़ुर्गों को सड़क पार करवा रहा था
चिंटू बच्चों को पढ़ा रहा था
पिंटू खेतों में किसानों की मदद कर रहा था
गाँव वाले हैरान थे। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था।
मुखिया ने बच्चों से पूछा,
“तुम्हें क्या हो गया है?”
चारों ने एक स्वर में कहा,
“हमें भगवान गणेश ने समझाया है। अब हम अच्छे बच्चे बनना चाहते हैं।”
गाँव में खुशहाली
धीरे-धीरे चारों बच्चे पढ़ाई में भी अच्छे हो गए। वे स्कूल में अव्वल आने लगे और गाँव का नाम रोशन किया।
अब वही बच्चे, जो कभी परेशानी थे, गाँव की शान बन गए।
हर साल गणेश चतुर्थी पर चारों बच्चे मिलकर सबसे सुंदर पंडाल बनाते और बच्चों को गणेश जी की कहानी सुनाते।
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