बहुत समय पहले एक घने जंगल के बीच एक शांत और निर्मल झील हुआ करती थी। उस झील के चारों ओर हरे-भरे वृक्ष, रंग-बिरंगे फूल और अनेक प्रकार के जीव रहते थे। उसी झील में एक कछुआ रहता था, जो देखने में धीमा और साधारण था, परंतु बुद्धि से अत्यंत चतुर और अनुभव से भरपूर था। उसी जंगल में एक हिरण भी रहता था, जो अत्यंत सुंदर, तेज़ और फुर्तीला था। उसे अपनी गति और चपलता पर बहुत गर्व था।

हिरण दिनभर जंगल में दौड़ता-भागता रहता और हर किसी को अपनी तेज़ी का प्रदर्शन करता। वह अकसर कछुए को देखकर हँसता और कहता, “मित्र कछुए, तुम्हें देखकर लगता है जैसे समय तुम्हारे लिए ठहर गया हो। तुम इतने धीमे क्यों हो?” कछुआ मुस्कुराकर उसकी बात सुन लेता, पर कभी उत्तर नहीं देता।

एक दिन जंगल में सूखा पड़ गया। झील का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा। पशु-पक्षी चिंतित हो उठे। सभी को भोजन और पानी की व्यवस्था की चिंता सताने लगी। हिरण को विश्वास था कि वह अपनी तेज़ गति से दूर-दूर तक जाकर भोजन और पानी खोज लाएगा। उसे लगा कि ऐसे समय में उसकी फुर्ती ही सबसे बड़ा सहारा है।

दूसरी ओर कछुआ शांत था। वह झील के पास बैठकर सोचता रहता और आने वाले संकट के लिए योजना बनाता। उसने देखा कि झील के पास की मिट्टी में अभी भी नमी है और कुछ जलीय पौधे उग रहे हैं। उसने धीरे-धीरे उन पौधों को सुरक्षित रखने की योजना बनाई ताकि भविष्य में काम आ सकें।

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हिरण रोज़ जंगल के दूरस्थ इलाकों में जाता, परंतु हर दिन खाली हाथ लौटता। रास्ते में वह थक जाता, कभी शिकारी से बचता, तो कभी काँटों में उलझ जाता। फिर भी उसका अहंकार कम नहीं हुआ। वह कछुए से कहता, “मैं कोशिश कर रहा हूँ, तुम तो बस बैठे रहते हो।”

एक दिन हिरण बहुत दूर निकल गया और रास्ता भटक गया। गर्मी और प्यास से उसकी हालत खराब हो गई। वह तेज़ तो था, पर सोच-विचार के बिना दौड़ता रहा। अंततः वह थककर एक पेड़ के नीचे गिर पड़ा। उसे लगा कि शायद अब उसका अंत निकट है।

उसी समय कछुआ अपनी धीमी चाल से उसी दिशा में आ रहा था। उसने हिरण को देखा और उसकी दशा समझ ली। कछुए ने पास की झील से कुछ पानी लाकर हिरण को पिलाया और उसे विश्राम करने को कहा। फिर उसने हिरण को सुरक्षित मार्ग से वापस झील तक पहुँचाया।

हिरण को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसने समझा कि केवल तेज़ी ही सब कुछ नहीं होती। बुद्धि, धैर्य और दूरदर्शिता भी उतनी ही आवश्यक होती है। उसने कछुए से क्षमा माँगी और उसका धन्यवाद किया।

इसके बाद जंगल में दोनों मित्रों की जोड़ी प्रसिद्ध हो गई—एक तेज़, दूसरा धीमा; एक बलवान, दूसरा बुद्धिमान। संकट के समय दोनों मिलकर काम करते और जंगल को सुरक्षित रखते।

नीति / सीख

केवल गति और उत्साह से सफलता नहीं मिलती; विवेक, धैर्य और सही समय पर लिया गया निर्णय ही जीवन को सुरक्षित और सफल बनाता है।

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By Rohit Kumar

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