बहुत समय पहले की बात है। एक विशाल और घना जंगल था, जहाँ तरह-तरह के पशु निवास करते थे। उसी जंगल में एक शक्तिशाली सिंह रहता था, जिसे सभी पशु जंगल का राजा मानते थे। सिंह अत्यंत बलवान था, पर कभी-कभी वह अपनी शक्ति के घमंड में आकर दूसरों की बुद्धि को कम आँक लेता था। उसी जंगल में एक सीधा-सादा गधा भी रहता था, जो मेहनती था लेकिन स्वभाव से मूर्ख और डरपोक था। तीसरा पात्र थी एक चालाक और बुद्धिमान लोमड़ी, जो अपनी चतुराई के लिए पूरे जंगल में प्रसिद्ध थी।
एक समय की बात है, सिंह बहुत दिनों से बीमार था। उसके शरीर में शक्ति की कमी हो गई थी और वह शिकार करने में असमर्थ हो गया था। उसे भूख सताने लगी और वह चिंतित रहने लगा कि यदि शीघ्र भोजन न मिला तो उसकी स्थिति और बिगड़ जाएगी। उसी समय लोमड़ी उसके पास आई और उसने सिंह की दुर्बल अवस्था देख ली। वह समझ गई कि यदि सिंह कमजोर हो गया, तो जंगल में शक्ति का संतुलन बदल सकता है।
लोमड़ी ने सिंह से कहा कि वह उसके लिए शिकार की व्यवस्था कर सकती है, बशर्ते सिंह उस पर भरोसा करे। सिंह ने मजबूरी में उसकी बात मान ली। लोमड़ी ने सोचा कि इस कार्य के लिए उसे किसी ऐसे पशु की आवश्यकता होगी, जिसे आसानी से बहकाया जा सके। उसका ध्यान तुरंत गधे पर गया, क्योंकि वह सरल स्वभाव का था और बातों में जल्दी आ जाता था।
लोमड़ी गधे के पास पहुँची और उससे बड़े प्रेम से बातें करने लगी। उसने गधे की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह जंगल का सबसे मधुर स्वर वाला पशु है और सिंह स्वयं उससे मिलना चाहता है। गधा यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुआ। उसे जीवन में पहली बार किसी ने इतना महत्व दिया था। उसने यह भी नहीं सोचा कि सिंह उससे क्यों मिलना चाहेगा।
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लोमड़ी गधे को सिंह की गुफा के पास ले गई। जैसे ही गधे ने गुफा में प्रवेश किया, सिंह ने उसे पकड़ने की कोशिश की। परंतु दुर्बलता के कारण वह पूरी शक्ति से हमला नहीं कर पाया। गधा किसी तरह जान बचाकर वहाँ से भाग निकला। वह बहुत डर गया और उसने लोमड़ी को छलिया समझा।
कुछ दिनों बाद सिंह ने लोमड़ी को बुलाया और कहा कि इस बार वह गलती नहीं होनी चाहिए। लोमड़ी ने फिर से योजना बनाई। वह गधे के पास गई और उसे समझाया कि सिंह उस दिन वास्तव में उसे सम्मानित करना चाहता था, पर गधे के डर के कारण सब बिगड़ गया। उसने यह भी कहा कि सिंह ने गधे की आवाज़ की बहुत प्रशंसा की है और अब वह उसे दरबार में सम्मान देना चाहता है।
गधा फिर से लोमड़ी की बातों में आ गया। उसे लगा कि शायद वह पहले गलत समझ बैठा था। वह दोबारा लोमड़ी के साथ सिंह की गुफा की ओर चल पड़ा। इस बार जैसे ही गधा भीतर पहुँचा, सिंह पूरी तैयारी के साथ था। उसने गधे पर झपट्टा मारा और उसे मार डाला।
सिंह भोजन पाकर संतुष्ट हुआ। लेकिन जब उसने लोमड़ी से कहा कि वह गधे का मष्तिष्क लाकर दे, तो लोमड़ी ने चतुराई से उत्तर दिया कि गधे का मष्तिष्क तो होता ही नहीं, क्योंकि यदि होता तो वह दूसरी बार यहाँ कभी नहीं आता। सिंह उसकी बातों पर हँस पड़ा।
इस घटना के बाद जंगल के अन्य पशुओं ने समझा कि केवल बल से नहीं, बल्कि बुद्धि से भी जीवन चलता है। गधे की मूर्खता और लोमड़ी की चालाकी दोनों ही जंगल में चर्चा का विषय बन गईं।
नीति / सीख
मूर्ख व्यक्ति बार-बार धोखा खाता है, जबकि चालाक अपनी बुद्धि से हर परिस्थिति में अपना लाभ निकाल लेता है। साथ ही, बिना सोचे-समझे किसी की मीठी बातों में आना विनाश का कारण बन सकता है।
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