बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल के भीतर एक विशाल और सुंदर झील थी। झील का पानी स्वच्छ और शांत था। चारों ओर हरे-भरे पेड़ थे और तरह-तरह के पक्षी वहाँ आकर मधुर स्वर में गाते थे। इसी झील में असंख्य मछलियाँ रहती थीं। उनमें तीन मछलियाँ विशेष रूप से प्रसिद्ध थीं, क्योंकि वे आपस में घनिष्ठ मित्र थीं और स्वभाव में एक-दूसरे से भिन्न थीं।
पहली मछली अत्यंत दूरदर्शी और बुद्धिमान थी। वह भविष्य के बारे में सोचकर निर्णय लेती थी। दूसरी मछली चतुर तो थी, लेकिन केवल उसी समय बुद्धि लगाती थी जब संकट सामने आ जाता था। तीसरी मछली स्वभाव से आलसी और मूर्ख थी। उसे न तो भविष्य की चिंता थी और न ही वर्तमान की। वह हमेशा यह सोचकर निश्चिंत रहती थी कि जो होगा, देखा जाएगा।
तीनों मछलियाँ साथ-साथ झील में रहती थीं और एक-दूसरे को अपनी सच्ची मित्र मानती थीं। पहली मछली अक्सर अपनी मित्रों को सावधान करती रहती थी कि जीवन में केवल वर्तमान का सुख ही नहीं, भविष्य की सुरक्षा भी आवश्यक है। लेकिन दूसरी मछली उसकी बातों को आधा मानती थी और तीसरी मछली तो उसका मज़ाक उड़ाती थी।
एक दिन दो मछुआरे उस जंगल से गुज़र रहे थे। जब उन्होंने झील को देखा, तो उसकी सुंदरता के साथ-साथ उसमें मछलियों की अधिकता ने उन्हें आकर्षित कर लिया। उन्होंने आपस में बातचीत करते हुए कहा कि यह झील मछलियों से भरी हुई है। यदि वे कल जाल लेकर आएँ, तो बहुत सारा शिकार कर सकते हैं। यह बात पहली मछली ने सुन ली।
पहली मछली तुरंत समझ गई कि यह झील अब सुरक्षित नहीं रही। उसने उसी समय अपनी मित्रों को बुलाया और सारी बात बताई। उसने सुझाव दिया कि सभी मछलियों को अभी इसी क्षण झील छोड़कर किसी और सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए। उसका मानना था कि संकट आने से पहले ही उससे बच जाना बुद्धिमानी है।
दूसरी मछली ने कुछ सोचते हुए कहा कि अभी तो मछुआरे गए हैं। जब वे आएँगे, तब कोई उपाय निकाला जाएगा। इतनी जल्दी झील छोड़ना उसे उचित नहीं लगा। तीसरी मछली ने हँसते हुए कहा कि मछुआरे रोज़ बहुत सी बातें करते हैं, पर हमेशा वापस नहीं आते। उसने पहली मछली को डरपोक कहा।
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पहली मछली ने बहुत समझाने की कोशिश की, लेकिन जब उसने देखा कि उसकी बातों का कोई असर नहीं हो रहा, तो उसने अकेले ही झील छोड़ने का निर्णय लिया। उसी रात वह एक संकरी जलधारा के माध्यम से दूसरी सुरक्षित नदी में चली गई।
अगले दिन मछुआरे अपने जाल लेकर वापस आए। उन्होंने झील में जाल डाल दिया। यह देखकर दूसरी मछली घबरा गई। अब उसे पहली मछली की बात याद आई। उसने तुरंत अपनी बुद्धि का प्रयोग किया। उसने अपने शरीर को निष्क्रिय कर लिया और पानी की सतह पर मरी हुई मछली की तरह तैरने लगी। मछुआरों ने उसे मृत समझकर बाहर फेंक दिया। जैसे ही वह पानी के पास पहुँची, वह फुर्ती से वापस नदी में कूद गई और बच गई।
तीसरी मछली न तो भविष्य के बारे में सोच सकी और न ही संकट के समय कोई उपाय निकाल पाई। वह जाल में फँस गई और मछुआरों के हाथ लग गई। उसका अंत दुखद हुआ।
कुछ समय बाद जब खतरा टल गया, दूसरी मछली ने पहली मछली से नदी में जाकर मुलाकात की। दोनों ने समझा कि जीवन में केवल मित्रता नहीं, बल्कि समझदारी भी आवश्यक होती है।
नीति / सीख
जो व्यक्ति भविष्य को देखकर निर्णय लेता है, वह सुरक्षित रहता है। संकट आने पर बुद्धि लगाना अच्छा है, लेकिन संकट से पहले सावधानी बरतना सबसे उत्तम होता है।
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